Qutub Ansari / Wed, Nov 13, 2024 / Post views : 82

बहराइच l परिवार नियोजन परामर्श एवं सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के मार्गदर्शन में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा ‘उम्मीद परियोजना’ के तहत, मोबियस फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्टाफ नर्सों, किशोर स्वास्थ्य काउंसलरों, और आईसीटीसी काउंसलरों को परिवार नियोजन विधियों, परामर्श कौशल, और उच्च गुणवत्ता वाली सेवाओं का प्रशिक्षण दिया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, परिवार नियोजन का उद्देश्य परिवार के आकार और बच्चों के जन्म के बीच के अंतराल को सुनिश्चित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से गर्भनिरोधक उपायों का उपयोग करना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि माता-पिता अपने परिवार के आकार का चयन कर सकें और पहला गर्भधारण 20 वर्ष की आयु पूरी होने पर ही करें, जच्चा बच्चा की सुरक्षा के लिए वह बच्चों के जन्म के बीच कम से कम तीन साल का अंतराल रख सकें, और अपनी आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार बच्चों की संख्या और उनकी परवरिश के प्रति जिम्मेदार रह सकें। उन्होंने जनपद में राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जनपद में 8.4 फीसदी किशोरियां 18 वर्ष से पहले गर्भवती हो जाती हैं, वहीँ 37.5 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 वर्ष से पहले हो जाती है, इसके कारण महिलाओं के शारीरिक, मानसिक और आर्थिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण परिवार नियोजन परामर्श की महत्वपूर्ण भूमिका है। ताकि सही समय पर निर्णय लेने में उन्हें आसानी हो। नोडल अधिकारी डॉ. एस.के. गौतम ने कहा कि यह प्रशिक्षण सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक सरजू ने बताया कि वर्तमान में आधुनिक गर्भनिरोधक विधियों की स्वीकार्यता दर केवल 33.4 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि समाज में परिवार नियोजन के सकारात्मक प्रभाव को अधिक व्यापक रूप से पहुंचाया जा सके। कार्यक्रम में विशेषज्ञ प्रशिक्षक डीसीपीएम मो. राशिद, सपना देवेश कुमारी, अभिषेक पाठक, और राज्य स्तर से डॉ. शोभा शामिल थे। उन्होंने परिवार नियोजन विधियों के उपयोग और प्रभावी परामर्श तकनीकों पर प्रतिभागियों को गहन जानकारी दी। प्रशिक्षुओं को हार्मोनल गर्भनिरोधक, गोली, कंडोम, कॉपर –टी और नसबंदी जैसी विधियों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही, प्रभावी परामर्श के कौशल को विकसित करने पर जोर दिया गया ताकि वे अधिक से अधिक लोगों तक इस जानकारी को पहुंचाकर उन्हें जागरूक बना सकें। प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी और व्यवहारिक बनाने के लिए समूह कार्य, रोल प्ले, और संवादात्मक सत्रों का आयोजन किया गया, जिससे प्रशिक्षुओं को परिवार नियोजन के परामर्श कौशल का अभ्यास करने का अवसर मिला। कार्यक्रम में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पी.के. बांदिल, डीएचआईओ बृजेश सिंह, डॉ. साफिया, डीपीएम सरजू खान , डीएफपीएस राम बरन यादव सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे l
विज्ञापन
विज्ञापन