शकील अंसारीनानपारा/बहराइच l मोहल्ला तोपखाना में सफीर नानपारवी के मकान पर अंजुमन गुलज़ार-ए-अदब की जानिब से एक तरही नशिस्त का आयोजन किया गया।
मिसरा था-लो मेरे ज़ब्त का दामन भी जला जाता है।इस मिसरे पर शायरों ने अपने-अपने कलाम पढ़ें। संचालन शहीद नानपारवी ने एवं सदारत हसन शंकरपुरी ने की।
इसमौके पर शायर व साहित्यकार रोशन ज़मीर ने पढ़ा-
तोड़ डालोगे मगर सच ही दिखेगा मुझ में
मुझको ऐसे नही आइना कहा जाता है
शहीद नानपारवी ने पढ़ा-
किस्सा हर इक से मिरे हाले ज़बूं का सुनकर
चाक उनका भी गिरेबान हुआ जाता है
सफ़ीर नानपारवी ने पढ़ा-
इश्क़ की राह में जो लोग हैं चलने वाले
उन्हे मजनू उन्हे पागल भी कहा जाता है
शम्स नानपारवी ने पढ़ा-
लोग अपनों से ही करते हैं अपने दिल की बात
हां नहीं कुछ भी तो इज़हार किया जाता है
क़ैफ़ नानपारवी ने पढ़ा-
ऐ ख़ुदा सर ये मिरा फिर न उठे इस दर से
बन्दगी का मज़ा तो हमको मिला जाता है
उमर नानपारवी ने पढ़ा-
नाम उर्दू का मिटाने में लगा है ज़ालिम
बोलता बातों में ख़ुद उर्दू चला जाता है
हसन शंकरपुरी ने पढ़ा-
सब्र मैं कर न सका और गिला कर बैठा
बस इसी वास्ते दीवाना कहा जाता है
आसिफ नानपारवी ने पढ़ा-
याद आती है जब भी तुम्हारी जानम
छिप के कमरे में तिरे ख़त को पढ़ा जाता है।
शकील मकी ने कहा शिद्दते धूप है मेरे साए में चले आओ- फिर ना कहना मेरा दामन जला जाता है । इस मौके पर हलीम अंसारी, लल्लन अंसारी, आरिफ खान व तमाम सामेईन मौजूद रहे।