-ई- बाउचर जारी कर अल्ट्रासाउंड कराने की दी गयी सलाह( कुतुब अंसारी )बहराइच l उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान कर सुरक्षित प्रसव कराने के उद्देश्य से जनपद में माह के चार दिन 01, 09, 16 एवं 24 तारीख को स्वास्थ्य इकाईयों पर ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ मनाया जाता है । इसी क्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पयागपुर में गुरुवार 9 तारीख को गर्भवती की समस्त जाँचे जैसे रक्तचाप, शर्करा, हीमोग्लोबिन, यूरिन, एच0 आई0 वी0 व पेट की जांच की गयी। इस अवसर पर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ पल्लवी सिंह ने सभी गर्भवती को उचित खान-पान की सलाह दी और समय-समय पर चिकित्सीय सलाह एवं जांच करने के लिए परामर्श दिया। साथ ही सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल में ही प्रसव कराने के लिए प्रेरित किया।
सीएचसी अधीक्षक डा0 थानेदार ने बताया कि ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस पर कुल 70 गर्भवती का पंजीकरण किया गया इनमें 19 गर्भवती उच्च जोखिम वाली पायी गयी जिन्हें उपचारित कर टीकाकरण और पौष्टिक आहार सेवन करने की सलाह दी गयी। इसके अलावा 65 गर्भवती को अल्ट्रासाउंड के लिए ई-बाउचर जारी किया गया जिसे वह योजना से जुड़े किसी भी प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जांच करा सकती हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के डीपीएम सरजू खान ने बताया कि जनपद में 48 अल्ट्रासाउंड पंजीकृत हैं । इनमें से 25 अल्ट्रासाउंड केन्द्रों को योजना से जोड़ा गया है । इन केन्द्रों पर ई – बाउचर के माध्यम से दूसरी व तीसरी तिमाही वाली गर्भवती अपना अल्ट्रासाउंड करा सकती हैं । इसके लिए उन्हें किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं देना होगा । बल्कि ई- बाउचर में अंकित बार कोड का स्कैन कर निजी अल्ट्रासाउंड सेण्टर संचालक स्वतः भुगतान कर सकेंगे । ई-वाउचर व्यवस्था के ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से करार किया है।
गर्भावस्था में जोखिम बढ़ाती है खून की कमी -
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ पल्लवी सिंह ने बताया कि एनीमिया यानि खून की कमी महिलाओं में होने वाली एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है। इसे गर्भावस्था के दौरान आयरन टेबलेट के सेवन से पूरा किया जा सकता है । गर्भावस्था में महिलाओं को आयरन की सामान्य से अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है क्योंकि इस दौरान गर्भस्थ शिशु भी अपनी आयरन की आवश्यकता माँ से ही प्राप्त करता है। उन्होंने बताया कि एनीमिया के लक्षण जैसे थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना, भूख न लगना आदि हैं । समय से एनीमिया प्रबंधन न होने की दशा में प्रसव पूर्व , प्रसव के दौरान या प्रसव के पश्चात अत्यधिक रक्तस्राव , बाधित भ्रूण विकास, नवजात में न्यूरल ट्यूब डिफ़ेक्ट, सांस लेने में अवरोध, जन्म के समय कम वजन, समय से पूर्व जन्म, मृत शिशु जन्म, एवं मातृ-शिशु मृत्यु में वृद्धि जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। इसके लिए केंद्र पर आयी सभी गर्भवती को आयरन व कैल्शियम की टेबलेट दी गयी है।
इस दौरान बीपीएम अनुपम शुक्ला ने सभी गर्भवती महिलाओं को ई-वाउचर की सुविधा से मुफ्त अल्ट्रासाउंड प्रयोग के विषय में बताया । मौके पर स्टाफ नर्स पदमा त्रिपाठी, सोनम प्रसाद, आशा कार्यकर्ती व लाभार्थी उपस्थित रहे।