Qutub Ansari / Sun, Aug 25, 2024 / Post views : 87
श्री कृष्ण से प्रेम रखते थे हसरत मोहानी,,,
शकील अंसारी
नानपारा/बहराइच l* भारतीय संस्कृति सहयोग एवं मैत्री संघ उत्तर प्रदेश के तत्वाधान में मशहूर शायर एवं साहित्यकार सारिक रब्बानी के आवास पर गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शायर एवं समाजसेवी मौलाना हसरत मोहानी को याद किया गया l इस मौके पर बोलते हुए शारिक रब्बानी ने कहा मौलाना हसरत मोहानी का जन्म जिला उन्नाव के मुहान में हुआ था और अंतिम संस्कार लखनऊ में किया गया। मोहानी हमारे देश के एक ऐसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हैं जिन्होंने हमेशा मजलूमों के लिए लड़ाई लड़ी और सच्चाई का साथ दिया आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया जेल गए। इंकलाब जिंदाबाद का नारा हसरत मोहानी ने दिया था देश की आजादी के बाद संविधान सभा का गठन हुआ जिसमें हसरत मोहानी को सदस्य के रूप में रखा गया था। हसरत मोहानी एक ऐसे सच्चे देश प्रेमी है जिन्होंने हिंदू मुस्लिम एकता के लिए कार्य किया श्री कृष्ण जी से प्रेम रखते थे और पाकिस्तान बनने का विरोध किया था। गोष्टी में शायरों ने अपने कलाम पेश किये -अयूब नानपारवी ने पढ़ा - गुल मोहब्बत के खिलाते हैं खिलाते रहिए। आप उस शोख से नज़रों को मिलाते रहिए। सफीर नानपारवी ने पढ़ा -दूर दुनिया बसाने की खातिर , चांद पर लोग जाने लगे हैं। डी पी श्रीवास्तव ने पढ़ा - वो मौज पे रहते होंगे सूरज कभी, सुबह हुई तो क्यूं मेरी कब्र पर खड़े रहे। ज़मीर नानपारवी ने देशप्रेम पर नज़्म पढ़ी।-गुरू ग्रन्थ गीता कुरान है देते ईश सन्देश,ऐसा मेरा देश है यारो ऐसा मेरा देश। कैफ़ नानपारवी ने पढ़ा -बचाया जा न सके जो कभी बचाने से, मकान रेत पे क्या फायदा बनाने से। शम्स नानपारवी ने पढ़ा - सच पूछिए तो अपने काबा को ढा दिया। दिल तोड के जनाब ने अच्छा नहीं किया। एम शारिक रब्बानी ने पढ़ा - प्रेम के गीत लिखूं लिख़ के तेरे नाम करूं। कभी राधा कभी मीरा को मैं प्रणाम करूं। शकील अंसारी (मकी) ने पढ़ा - इंसा मुसाफिर है चलता रहेगा। निज़ाम ए ज़माना बदलता रहेगा। इनके अलावा हुस्न तबस्सुम निहा, सरफराज अहमद सिद्दीकी , चन्द्र भाल , आदि ने भी अपने कलाम पेश किए।
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