रईस खानमिहींपुरवा/बहराइच l कतरनिया घाट वन्यजीव प्रभाग के विभिन्न रेंज में हो रही वन्य जीवों की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने हेतु अनुरोध पत्र देकर गिरिजापुरी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता जंग हिंदुस्तानी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विगत 2023 से वर्तमान 9 अप्रैल 25 तक वन जीवो की मौत पर वन विभाग पर सवालिया निशान उठाया है l इसी के संदर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री से वन जीवो की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु की जांच के लिए प्रार्थना पत्र दिया हैं
कि मुख्यमंत्री महोदय पिछले 1 साल के अंदर कतर्निया घाट वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत विभिन्न रेंजो में न जाने कितने वन्य जीव (जिसमें हाथी ,बाघ ,तेंदुआ, घड़ियाल, जैसे श्रेणी-1 के वन्यजीव भी शामिल है) संदिग्ध परिस्थितियों में मृत हो चुके हैं। आये दिन होने वाली मृत की घटनाओं से इस क्षेत्र में रहने वाले लोग काफी दुखी और स्तब्ध हैं। वन्य जीवों के मृत्यु के कारणों को संवेदनशीलता से नहीं लिया जा रहा है। खाना पूर्ति के नाम पर हर बार पोस्टमार्टम किया जाता है और सिर्फ तीन तरह की रिपोर्ट आने की सूचना अखबारों के माध्यम से मिलती है-
1-आपसी संघर्ष में मौत हुई।
2-हृदय गति रुकने से मौत हुई।
3-पानी में डूबने से मौत हुई।
कतरनिया घाट में अगर कोई वन्यजीव घायल मिले तो उसके इलाज के लिए दूर दूर तक डाक्टर नहीं मिलते हैं लेकिन पोस्टमार्टम करने के लिए तुरंत मिल जाते हैं।
अगर मीडिया के लोगों के माध्यम से सूचना ना मिले तो संबंधित अधिकारियों द्वारा आम जनता से वन्य जीवों की मौत की सूचना को छिपाया जाता है।
इससे प्रतीत होता है कि वन्य जीव संरक्षण के लिए नियुक्त अधिकारी वन्य-जीवों के संरक्षण के प्रति संवेदनशील नहीं है।
अतः आपसे निवेदन है कि कतरनिया घाट वन्य जीव अभयारण्य जैसे महत्वपूर्ण वन्य जीव वास स्थल से अनुभवहीन अधिकारियों को सामाजिक वानिकी में स्थानांतरित करते हुए उनके स्थान पर कुशल, योग्य , वन्य जीव के मामलों के जानकार, प्रशिक्षित और संवेदनशील वन अधिकारियों की नियुक्ति किए जाने की कृपा करें, साथ ही 1 जनवरी 2023 से 9 अप्रैल 2025 के मध्य हुए समस्त वन्य जीवों की मृत्यु के मामले की किसी अन्य विभाग से उच्च स्तरीय जांच कराई जाने की कृपा करें। कतर्निया घाट में वन्य जीव की मौत से जंग हिंदुस्तानी ही नहीं अन्य पर्यावरण प्रेमी वन्य जीव प्रेमी भी एवं पर्यटक दुखी है।