Qutub Ansari / Thu, Nov 21, 2024 / Post views : 86
श्याम श्रीवास्तव

पयागपुर/बहराइच l पयागपुर क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम रेवली मे जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, के अध्यक्ष बाबा पंकज महाराज की 108 दिवसीय शाकाहार सदाचार मद्यनिषेध आध्यात्मिक वैचारिक जन-जागरण यात्रा अपने 99 वें पड़ाव पर बुधवार सायंकाल रेवली पहुॅची। यात्रा का कलश दीपों के साथ पुष्पवर्षा व गाजे बाजो से भव्य स्वागत किया गया। बाबा पंकज महाराज ने कहा कि सत्संग से विवेक जागता है। मानव-धर्म, मानव-कर्म के पालन की दिशा मिलती है। अच्छे संस्कार मिलने से चरित्र उत्तम होता है l अच्छा नेक समाज बनाने के लिए सत्संग की बहुत बड़ी जरूरत है। सत्संग द्वारा सत्य दया करुणा उदारता समता मानवी-प्रेम, परोपकार मानव सेवा जैसे मानवीय गुणों का विकास होता है। उन्होंने कहा कि सभी धर्माें में अहिंसा परमो धर्मः की शिक्षा दी गई है। शरीर परमात्मा का बनाया चेतन मन्दिर है। इस बोलते-डोलते, चलते फिरते मन्दिर में अखण्ड दीपक जल रहा है।”परम प्रकाश रूप दिन राती नहिं कछु चहिय दिया घृत बाती। प्रभु परमात्मा के लोक की आकाशवाणियाँ चौबीसों घण्टे गुंजारमान हैं। किसी धर्म-ग्रन्थ या देवी देवता अथवा महापुरुष ने माँस खाने शराब पीने जीव हिंसा करने पेट को शमशान घाट बनाने का आदेश नहीं दिया है। सबमें एक ही परमेश्वर की अंश जीवात्मा विराजमान है। फिर भेदभाव किस बात का ? बाबा जयगुरुदेव के एक मात्र उत्तराधिकारी ने कहा कि भगवान को पाने का रास्ता किसी पूरे सन्त सतगुरु से मिलेगा। सन्त कोई हाँड़-मॉस के शरीर दाढ़ी बाल भेष, भूषा पहनावे या तिलक चन्दन का नाम नहीं। सन्त नाम उसका जिसने जीते जी प्रभु को प्राप्त कर लिया हो। सच्चे महात्मा दिव्य दृष्टि खोलने का विज्ञान जानते हैं। जिसे परा ज्ञान, ईश्वरीय विज्ञान या आध्यात्मिक विज्ञान कहते हैं। जहाँ दुनिया का विज्ञान समाप्त हो जाता है, उसके सिर की चोटी से आत्मा-परमात्मा के गूढ़ ज्ञान रहस्य विज्ञान की शुरुआत होती है। उन्होंने कहा कि मृत्युलोक कर्म प्रधान देश है सबको अदला बदला देना पड़ता है। इसलिये सभी लोग अपने-अपने दीन ईमान पर, महापुरुषों के आदर्शाें पर चलें। बिना शाकाहार अपनाये और मद्यमुक्त हुए बिना भजन या इबादत नहीं हो सकती। उन्होंने सभी वर्ग धर्म जाति, मजहब स्तर के लोगों से शाकाहारी और नशामुक्त बनने की अपील की। शाकाहार, नशामुक्ति और भगवत्-भजन के प्रबल प्रचारक आध्यात्मिक सन्त ने कहा कि परिवर्तन कोई कानून बनाने से, तोड़फोड़, आन्दोलन, हड़ताल करने से या भाषण अथवा वक्तव्य देने से नहीं होता। परिवर्तन तब होता है, जब लोगों के विचार और भावनायें बदलती हैं। विचार और भावनायें तब बदलती हैं, जब लोगों का खानपान शुद्ध होता है। उन्होंने आगामी 8 से 12 दिसम्बर 2024 तक जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में पारम्परिक रूप से आयोजित पूज्य पाद स्वामी घूरेलाल जी (दादा गुरु) जी महाराज के 76 वें पावन वार्षिक भण्डारा महापर्व में भाग लेने का निमन्त्रण दिया। इस अवसर पर रमाकान्त चौहान, सल्लन जायसवाल, लालमनि विश्वकर्मा, ग्राम प्रधान राम गोपाल आर्या, पिन्टू, राम समुझ जायसवाल, रमेश चन्द पाण्डेय, बनवारी लाल, सहयोगी संगत के घूरन प्रसाद, चन्द्रमा यादव सहित संस्था के अनेक पदाधिकारी, प्रबन्ध समिति व सामान्य सभा के सदस्य उपस्थित रहे।
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