सिराज अली कादरीकैसरगंज/बहराइच l शरदकालीन गन्ना की खेती के लिये 25 सिंतबर से लेकर 30 नवंबर तक का समय सबसे उपयुक्त रहता है l किसान गन्ना फसल के साथ सहफसल के रूप में आलू, लहसुन, सरसो , मटर, मसूर व लाही की बुवाई कर सकते हैं जिससे किसानो को गन्ना बुवाई में लगाई गयी लागत सहफसल की पैदावार से वापस मिल जाती है। गन्ना की उपज 25% तक अधिक मिलती है। यह बाते ग्राम मैना में आयोजित किसान गोष्ठी में आए हुए किसानो से कही। यह शरद कालीन गन्ना बुवाई के लिए अनुकूल मौसम है गन्ने की बुवाई ट्रेंच विधि से ही करें। नाली से नाली की दूरी 4 फिट से कम न हो। इस समय अच्छे गन्ना बीज की उपलब्धता है। को0- 15023, 0118, कोशा- 13235, को0लख0 14201 गन्ने का बीज क्षेत्र में प्रयाप्त है । किसान भाई एक एकड़ खेत में 3-5 बैग जैविक शक्ति में 10 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा मिला कर एक सप्ताह के लिए ढक कर रख दें तथा नमी बनाए रखने के लिए पानी का छीटा सुबह मारते रहें। एक सप्ताह बाद खेत में बिखेर कर गहरी जुताई कर दें। गन्ना बीज शोधन हेक्जास्टाप से करें। 25 कुन्तल बीज के लिए 100 ग्राम हेक्जास्टाप, को 100 लीटर पानी में धोलकर गन्ने के टुकड़े को 30 मिनट के लिए डुबोकर रख ले तथा बुवाई करें। एक एकड के लिए 100 किलोग्राम डी ए पी , 3 बोरी आर्गेनिक पोटाश, 25 किलोग्राम युरिया को 10 किलो जिंकफास्फेट मिलाकर बुवाई के समय कूड़ो में डाल कर फिर बुवाई करें। ध्यान रहे कि पहले कूड़ो में उर्वरक डालें फिर गन्ने के पैड़ो को डालें।