Qutub Ansari / Sun, Oct 27, 2024 / Post views : 125
सिराज अली कादरी
कैसरगंज/बहराइच l
चीनी मिल पारले की ओर गोड़हिया -1 गांव में आयोजित शरद कालीन गन्ना बुवाई कृषक गोष्ठी में चीनी मिल के उप मुख्य प्रबंधक (गन्ना) वहाजुद्दीन ने किसानों से कहा कि वह ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई करें लाइन से लाइन की दूरी 4 फिट से कम न रखे, तभी पैदावार में 25% तक अधिक होगी। गन्ने के साथ आलू, लहसुन, प्याज, मसूर, धनिया, मटर आदि की सह फसली खेती करके दोहरा लाभ पाए।
किसानों से कहा कि वह खेत की मिट्टी को बंजर होने से बचाने के लिए रासायनिक खादों पर अधिक निर्भर न रहें । इसकी जगह जैविक खादों का प्रयोग करके अपनी पैदावार बढाए। हानिकारक कीटों से फसलों को बचाने के लिए जैव पेस्टिसाइड का खेती में उपयोग करें। इससे खेत की मिट्टी उपजाऊ बनी रहेगी।
प्रकृति का हलवाहा कहा जाने वाला केंचुवा खेत की मिट्टी में फिर से वापस लौट आएगा। उन्होंने गोष्ठी में किसानों को किसानों से कहा कि वह गन्ने की नवीनतम रोग मुक्त प्रजातियां जिनमें 0118, 15023, 14201 व 13235 की बुवाई करें। मिट्टी का उपचार ट्राईकोडर्मा से और बीज का उपचार हेक्जास्टाप से अवश्य करें। एक एकड़ भूमि में 3-4 बोरी जैविक शक्ति में 10 किग्रा ट्राइकोडर्मा मिला कर 5 दिन के लिए मिलाकर रख दें अन्तिम जुताई के समय खेत मे बिखेर कर जुताई करें।
जिससे उन्हें गन्ने की भरपूर उपज मिलेगी। क्षेत्र में गन्ने की प्रचलित 0238 व प्रजाति की बुवाई अब न करें। गन्ने की यह प्रजाति रेड राड रोग से ग्रसित होकर सूख रही हैं। गन्ने के साथ दलहनी, तिलहनी व सब्जियों की खेती जरूर करें जिससे उनकी आय दोगुनी होगी। किसान गोष्ठी में क्षेत्र के गन्ना किसान गुलजारी, प्रमोद कुमार, सदगुरू ,ननकू प्रसाद, राम लखन , जियालाल, विजय नारायन, छोटे लाल, मिल्की राम सहित साथ बड़ी संख्या में गन्ना किसान मौजूद रहे।
मिल के गन्ना अधिशासी आदर्श परमार, मायाराम ने अपने संबोधन मे किसानो से कहा कि अपने खेत में जैविक विधि से गन्ने की खेती में शब्जी, उड़द और सरसो, मसूर की सह फसली खेती करके दोहरा लाभ ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि गन्ने की खेती पूरी तरह से जैविक खाद और जैव कीटनाशकों के उपयोग से कर रहे हैं। इसमें सफसली खेती करके अन्य फसले भी उगा रहे हैं। उनकी खेती को देखकर गांव और क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान गन्ने के साथ सह फसली खेती करने लगे हैं।
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