Qutub Ansari / Tue, Mar 12, 2024 / Post views : 162
( कुतुब अंसारी )
बहराइच l रमज़ान का महीना इंतिहाई खैर व बरकत का महीना है, रमज़ान का महीना नेकियों के कमाने का महीना है l रमज़ान में नेकियों में बढ़ोतरी कर दी जाती है, फ़र्ज़ इबादतों का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है और नफल इबादतों का सवाब फ़र्ज़ इबादतों के बराबर कर दिया जाता है l इन ख्यालात का इज़हार मदरसा सुल्तानुल उलूम मीरपुर कस्बा किसान बाज़ार के पीछे मोहल्ला सालार गंज बहराइच के संस्थापक एवं प्रबंधक मौलाना सिराज मदनी ने किया।
उन्होंने कुरआन ए करीम के हवाले से कहा कि"ऐ ईमान वालो तुम पर रोज़ा रखना फ़र्ज़ किया गया, जैसा कि तुम से पहली उम्मतों पर रोज़ा रखना फ़र्ज़ किया गया था, ताकि तुम्हारे अंदर तक़वा की सिफ़त पैदा हो l
मौलाना सिराज मदनी ने कहा कि रोज़ा सिर्फ खाने पीने और जिस्मानी ख्वाहिशों से रूकने का नाम नहीं है, बल्कि रोजेदार को चाहिए कि वह अपनी आंखों से गैर महरम को न देखे किसी भी व्यक्ति की बुराई न करे और न ही सुने l उन्होंने कहा कि रमज़ान के एक माह का रोज़ा यह पूरे 11 महीने के लिए प्रेक्टिस है, जिस तरह रमज़ान के पूरे महीने इन्सान अल्लाह की इबादत करता है l खाने पीने का सामान होने के बावजूद वह बिना अल्लाह के हुक्म से खाता पीता नहीं है l इसी तरह अल्लाह के बन्दों को चाहिए कि वह रमज़ान के अलावा साल के पूरे 11 महीने भी अल्लाह के हुक्म के खिलाफ कोई काम न करें l किसी पर ज़ुल्म न करें किसी का हक़ न दबाएं l मौलाना सिराज मदनी ने हदीस ए नबवी के हवाले से कहा कि बद नसीब है वह शख्स जिसको रमज़ान का मुबारक महीना मिले और उसकी मगफिरत न हो ।
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