Qutub Ansari / Wed, Mar 13, 2024 / Post views : 111
जरवल/बहराइच। जटायू के वंशज गिद्धों के झुण्ड अब दिखाई नही पड़ते जब कि गिद्ध प्रयावरण को संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका भी निभाते थे। बताते चले दर्द और सूजन निवारक डाइक्लोफिनेक सोडियम ही गिद्धों के विलुप्त होने की मुख्य वजह रही। एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2006 तक यह दवा जानवरों के इलाज के इलाज में इस्तेमाल की जाती थी और जानवरों मे इस्तेमाल के दौरान जानवर मर जाए और उसे फेंक देने के बाद उसे जितने भी गिद्ध खाते थे 70 से 80 घंटे के भीतर विजरल गाउट के कारण दम तोड़ देते थे। लेकिन दुर्भाग्य बस आज भारत में गिद्धों की जनसंख्या बहुत तेजी से गिर रही है।सूत्रो की माने तो वर्ष 1990 में गिद्धों के कुल संख्या लगभग 4 करोड़ थी जो आज घटकर 60 हजार से कम हो गई हैं। बताते चले भारत के आंध्र प्रदेश राज्य से गिद्ध पूर्णतः विलुप्त हो चुके हैं। जब कि 1980 के मध्य तक देश में पर्याप्त संख्या में गिद्ध पाए जाते थे। गिद्धों की संख्या में गिरावट का प्रमुख कारण डिप्लोफिइनेक दवा है जो पशुओं के शवों को खाते समय गिद्धों के शरीर में पहुंच जाती है पशुचिकित्सा में प्रयोग की जाने वाली डाइक्लोफिनेक को वर्ष 2008 में प्रतिबंधित कर दिया गया था।इसका प्रयोग मुख्य रूप से पशुओं में बुखार सूजन उत्तेजन की समस्या निपटाने में किया जाता था। अब गिद्धों की संख्या कम हो रही है क्योंकि बढ़ते प्रदूषण और घटते जंगलों के चलते भी उनके प्राकृतिक आवास ने नष्ट जो हुए हैं। गिद्ध का मुख्य भोजन मृत पशु होता है लेकिन इन मृत जानवरों को खाने से गिद्ध के शरीर में यूनिक अम्ल बनता है जो इनकी किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचाता है। विविधतापूर्ण खान-पान में यह सही है कि गिद्धों को मांस और पशुओं को खाने के लिए जाना जाता है लेकिन सभी गिद्ध केवल सड़ा हुआ मांस नहीं खाते जैसा कि नाम से ही जाहिर होता है पाम नट वल्चर (गिद्ध) कई तरह के अखरोट अंजीर मछली और कभी-कभी पक्षिंयो को भी खाता है, कंकालों का मुकाबले इसे कीड़े और ताजा मांस काफी पसंद भी है।
बाक्स अब सरकार ने शुरू किया गिद्धों का संरक्षण
जरवल। प्राकृतिक सफाई कर्मी माने जाने वाले गिद्धों की संख्या लगभग आबादी के मारे जाने के बाद सरकार अब संरक्षण के लिए प्रयास करें l
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