Qutub Ansari / Sun, Mar 24, 2024 / Post views : 97
मिहींपुरवा/बहराइच। होली, भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख त्योहार है जो रंगों का उत्सव मनाने के लिए माना जाता है। यह त्योहार हिन्दू पंचांग के फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और भारत व अन्य कई देशों में धूमधाम से मनाया जाता है। और इस बार होलिका दहन 24 मार्च सुबह 9 बजकर 54 मिनट से शुरू होगी और समापन 25 मार्च दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर होलिका धूल उड़ाकर होगी। होली का महत्व रंगों की भरमार, खुशियों का प्रकटीकरण और बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाने में है। जहाँ सभी के मन मे होली पर्व को लेकर एक उमंग रहती हैं तो वहीं कुछ व्यापारी मीठे मे, रंगो मे मिलावट कर डालते हैं हमारे महापर्व मे खलल।
होली का इतिहास
भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद की याद में मनाया जाता है। पौराणिक धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई थी। तब भगवान विष्णु ने हिरण्यकशिपु के षड़यंत्र को ध्वस्त कर होलिका को भस्म कर दिया और श्रीहरि की कृपा से भक्त प्रह्लाद बच गया। उसी दिन से यह त्योहार मनाया जाने लगा।
होली पर्व की विशेषता मे हैं एकता
एकता:- होली के दिन सभी लोग रंगों में खेलते हैं और इस दिन अलग-अलग जाति, धर्म और वर्ग के लोग एक साथ उत्सव मनाते हैं। इसलिए यह हमें एकता और भाईचारे का संदेश देता है। खुशी और उत्साह: होली के दिन सभी लोग खुश होते हैं और उत्साह से भर जाते हैं।
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