( सिराज अली कादरी )कैसरगंज/बहराइच l सी पी सिंह के नवीन आवास गल्लामंडी गुथिया मोड़ पर आयोजित नव दिवसीय अमृतमयी श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस भागवत कथा में वर्णित सती के चरित्र का वर्णन करते हुए व्यास पीठ से पंडित बृजेश कुमार शास्त्री एवं आचार्य बाबुल जी महाराज ने शिव और सती से संबंधित प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि दक्ष प्रजापति के यज्ञ में शिव और सती का आमंत्रण न होने पर भी सती को पति के लाख समझाने पर मायके जाने की जिद का परिणाम संसार के सामने है कि पति धर्म से विमुक्त होने पर कितना घोर संकट जीवन पर पड़ता है। अतः स्त्री का कर्तव्य है कि अपने पति के हर कार्यों में सहयोग प्रदान करें एवं बिना अनुमति किसी भी कार्य को ना करें । जिससे उनका जीवन सफल रहे। भगवान शंकर भी एक आदर्श पति के भांति महाशक्ति के सती होने पर दक्ष के यज्ञ का विनाश करने के लिए वीरभद्र को अपनी जटाओं से उत्पन्न किया। जिसके द्वारा दक्ष का अंत हुआ और सती के शरीर की विभूति को शंकर जी ने अपने शरीर पर धारण कर आजीवन भस्म धारण करने एवं भस्म चढ़ने वाले को मुक्ति प्रदान करने का वरदान दिया। सती के सतीत्व का प्रभाव जिसे सारा संसार और इस व्यास पीठ के माध्यम से सभी श्रोता शिव शक्ति को हृदय स्थल से नमन एवं प्रणाम करते हैं। इस अवसर पर मुख्य यजमान चंद्र प्रताप सिंह उर्फ सी पी सिंह मास्टर साहब अपने कुटुंब, मित्रगण एवं समाज के प्रतिष्ठित स्वजनों के साथ भागवत कथा का रसपान किया।