रुपईडीहा अंतरराष्ट्रीय लैंड पोर्ट पर शुल्क बढ़ोतरी से एजेंट ट्रेडर और ड्राइवरों में आक्रोश, व्यापार ठप होने की आशंका
प्रशासन सतर्क, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, व्यापारियों ने सुविधाओं में सुधार और शुल्क वापसी की मांग की

एम अरशद
बहराइच ( रुपईडीहा )। भारत नेपाल सीमा से जुड़े रुपईडीहा लैंड पोर्ट पर वजन, पार्किंग और स्टोरेज शुल्क में बढ़ोतरी के बाद ट्रेडर, ट्रांसपोर्ट एजेंट और ड्राइवरों में नाराजगी बढ़ गई है। लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा जारी नवीनीकृत शुल्कों के विरोध में किसी भी समय हड़ताल या विरोध प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है। संभावित तनाव को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी कर सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। 16 नवंबर को जारी प्रशासनिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि एलपीएआई द्वारा 15 नवंबर से लागू किए गए संशोधित शुल्क सीमा के कारण विरोध की आशंका हैं। दिल्ली मुख्यालय से प्राप्त सर्कुलर के बाद लागू हुए इन शुल्कों के विरोध में व्यापार बंद, धरना या प्रदर्शन की आशंका जताई गई है। पत्र में संबंधित पुलिस अधिकारियों और क्षेत्रीय एडमिनिस्ट्रेशन को व्यापार और आवागमन बाधित न होने देने तथा सुरक्षा बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। कस्टम हाउस एजेंट हसीब अहमद सहित कई ट्रेडरों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर शुल्क बढ़ोतरी और लैंड पोर्ट की अव्यवस्थित व्यवस्थाओं पर गंभीर आपत्ति जताई है। ज्ञापन के अनुसार इंटरनेशनल सुविधा की स्थिति बेहद खराब है, जिससे माल की क्लियरेंस में घंटों की देरी होती है। नए शुल्कों के चलते ट्रेडरों और ड्राइवरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।पार्किंग, वजन एवं स्टोरेज शुल्क की व्यवस्था अव्यवस्थित, जिससे रोजाना विवाद की स्थिति बनती है। माल के प्रवेश निकास के लिए 24 घंटे सुविधा उपलब्ध नहीं, जिससे व्यापार बाधित होता है। स्थानांतरण, जीएसटी और अन्य परिचालन खर्च बढ़ने से व्यापारियों पर विपरीत असर पड़ा है। अन्य इंटरनेशनल चेकपोस्ट्स आईसीपी पर कम शुल्क और बेहतर सुविधाएं होने के कारण व्यापारी अन्य स्थानों की ओर पलायन कर सकते हैं। ज्ञापनदाताओं ने कहा है कि यदि व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं हुआ तो सीमा व्यापार पूरी तरह रुक सकता है, जिससे सरकारी राजस्व और स्थानीय रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। बढ़े हुए शुल्कों को लेकर ज्ञानदाताओं में गहरी नाराजगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विरोध तेज हुआ, तो इसका सीधा असर सीमा पार ट्रांजिट, माल की क्लियरेंस, दैनिक व्यापारिक गतिविधियों और सरकारी राजस्व पर पड़ सकता है। आईसीपी प्रशासन ने स्थिति पर निकट निगरानी रखने, सुरक्षा बढ़ाने और व्यापार सुचारू रखने के आदेश जारी किए हैं। दूसरी ओर ज्ञापनदाता सुविधा सुधार, शुल्क वापसी और व्यवस्थागत सुधार की मांग पर अडिग हैं। रुपईडीहा आईसीपी पर शुल्क बढ़ोतरी ने सीमा व्यापार को संकट की स्थिति में ला खड़ा किया है। आईसीपी प्रशासन समाधान की दिशा में प्रयासरत है, जबकि ज्ञापनदाता तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाने की मांग कर रहे हैं। यदि विवाद लंबा खिंचा, तो भारत नेपाल सीमा पर व्यापार की रफ्तार थम सकती है।




